मुझपे मेरा गर्व मुझपे मेरा गर्व, मुझे सिखाता है स्वम से प्रेम करना मुझपे मेरा गर्व सिखाता है, हिम्मत नहीं हारना मुझपे मेरा गर्व सिखाता है, अटूट विश्वास से जीवन जीना मेरा गर्व मुझे सिखाता है, विपरीत परिस्थिति से निकलना, जो मुझे तोड़ कर बिखेर सकते थे, मुझे मेरा गर्व सिखाता है परिवार को जोड़े रखना, क्यूंकि उनसे ही मेरा वजूद कायम है इस दुनिया में मुझे मेरा गर्व सिखाता है, रोज़ रोज़ एक ही काम को उसी जोश से करना, क्यूंकि जीवन को उबाऊ बना कर जिया नहीं जा सकता स्री का गर्व उसके माथे में लगे कुमकुम की तरह है हमेशा उसे ऊर्जा से भर देने वाला स्वयं में गर्व करना अभिमान की श्रेणी में नहीं आँका जाना चाहिए, गर्व ऐसा हो जो जीवन में आगे ले जाये, ईर्ष्या द्वेष अभिमान को कोसों दूर रखे, मेरा गर्व मुझे जीवन की छोटी छोटी खुशि यों में खुश रहने की प्रेरणा देता है, मेरा गर्व मुझे निरंतर मेरे होने की प्रेरणा देता है.
कभी किसी लड़की का गुस्सा देखा है तुमने, कितनी तहों में छुपा रहता है, कितनी बातों को समेटे खुद में, अंदर ही अंदर बस दबा रहता है। इस डर से के कही बहा न ले जाये उन रिश्तों को जिनकी आदत है उसे। हर बार जब तुम टाल जाते हो उसके ज़रूरी काम को अपने बहोत ज़रूरी काम के आगे, वो तब भी गुस्सा होती है, पर तुम्हे उसके समझदारी के आगे गुस्सा नज़र नहीं आता, सुबह से शाम ऑफिस के काम से वो भी थक के ऊब चुकी होती है, लेकिन तुम आके जब उससे लाड़ प्यार की मांग करते हो, वो तब भी गुस्सा होती है, पर तुम्हें उसका मासूम चेहरा नज़र आता है, गुस्से में दहकता दिल नहीं। तुम्हारे लेट रिप्लाई से नहीं तुम्हारे नो रिप्लाई से वो गुस्सा होती है, तुम्हारे रोज़ रोज़ नए बहाने से नहीं,तुम्हारे रोज़ रोज़ की तस्सली देने से वो गुस्सा होती है। तुम्हारे सच कहने से नहीं, तुम्हारे झूठ को छुपाने से वो गुस्सा होती है, कह के तुम्हारी भूलने की आदत से वो गुस्सा होती है,तुम्हारी अपनी कही बात और अपने ही दिए वादे को पूरा ना कर पाने में वो गुस्सा होती है, उससे सिर्फ अच्छाई की उम्मीद रखने वाले तुम्हारे भर्म से वो गुस्सा होती है, वो यूँ ही अपने...
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